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Tuesday, 20 February 2018

अल्बर्ट आइंस्टीन के बारे में ऐसे तथ्य जिनसे शायद आप अभीभी बेखबर है।

Albert Einstein ke bare me aise tathya jinse shayad aap abhibhi bekhabar hai.

 

Hi Friends,

                    Aaj hum janenge Duniya ke sabse mashur scientist Albert Einstein ke aise hi kuch aise tathya jinse aap abhibhi bekhabar hai, agar aap bhi Albert Einstein ke FAN hai to aapko bhi ye janna chahiye.

 Introduction to Albert Einstein

          अल्बर्टआईंस्टाइन का जन्म 14 मार्च 1978 को जर्मनी में हुआ था, ये दिन  पूरी दुनिया  में  जीनियस दिन के रूप में मनाया जाता है। वह एक विश्वप्रसिद्ध सिंधिक भौतिकविद् थे, जो सपेक्षता के सिंधांत और द्रविण उर्जा समिकरण E = mc2 के लिए जाने जाते हैं। उन्हें सैद्धांतिक भौतिकी, खासकर प्रकाश-विद्युत ऊत्सर्जन की खोज के लिए १९२१ में नोबेल पुरष्कार  प्रदान किया गया।

 

Albert Einstein se jude Top 10 Ajab-Gajab Tathya

10)         जब आईंस्टाइन विश्वविद्यालय में कार्यरत थे तब एक स्टूडेंट उनसे आकर बोला इस साल के परीक्ष्या में पिछले साल के पेपर के ही प्रश्न्न  आये है। इसपरअल्बर्टआईंस्टाइन ने कहा, लेकिन इस साल के परीक्ष्या में उत्तर बदल गये है। इससे हमे ये पता चलता है की एक वैद्न्यानिक सोच  वाला इंसान उस सब्द पर भी विचार करता हैं जिनपर आम लोग ध्यान भी  देते

 

9)           १९५२ में अमेरिका ने आईंस्टाइन को इसराइल  राष्ट्रपति बनाने में पेशकस की परन्तु आईंस्टाइन ने सिर्फ यह कहकर ठुकरा दिया की वे राजनीती  के लिए नहीं बने

 

 8)         आईंस्टाइन के  गणित के प्रोफेसर ने उन्हें लेज़ी डॉग तक कह दिया था, क्युकीआईंस्टाइन पढाई में बहुत ही कमजोर थे

 

 7)          जब आईंस्टाइन एक यूनिवर्सिटी में कार्यरत थे तो,  एक दिन यूनिवर्सिटी से घर जाते समय वो अपने ही घर का पता भूल गए थे, वो जहा रहते थे वहा के लोग आईंस्टाइन को जानते थे पर वो जिस टैक्सी में बैठे थे उसका ड्राइवर उन्हें नहीं पहचानता था, आईंस्टाइन ड्राइवर के पास गए और कहा क्या तुम्हे आईंस्टाइन का पता मालूम है? तो ड्राइवर ने जवाब दिया, यह कौन भला उनका पता नहीं जानेगा, यदि आप उनसे मिलना चाहे तो मैं आपको उनके घर छोड़ सकता हु, तब उन्होंने ड्राइवर को बताया की वे ही आईंस्टाइन है और अपने ही घर का पता भूल गए हैं,  तो ड्राइवर ने उन्हें उनके घर छोड़ दिया और उनके लाख मना करने पर  एकभी पैसा  नहीं लिया

 

6)          अल्बर्ट आईंस्टाइन को स्कूल जाना पसंद नहीं था क्युकी, स्कूल में जो पढ़ाया जाता है वो उन्हें ज्यादा इंटरेस्टिंग नहीं लगता था

 

5)           अल्बर्ट आईंस्टाइन के जन्म के बाद ४ साल तक वो बोल नहीं पाए थे, इस कारन से उनके घरवाले घबरा गए थे, की उनका बेटा बोल भी पायेगा के नहीं , मगर जब ४ साल बाद आईंस्टाइन अपने माता पिता के साथ रात के खाने पर बैठे थे तब उन्होंने अपनी ४ साल की चुप्पी तोड़ते हुए कहा था सोप बहुत गर्म हैं, अपने बेटे की चार साल बाद अचानक बोलने से आईंस्टाइन के माता-पिता हैरान हो गए थे

   

 

4)           कैलिफ़ोर्निया इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी ने अल्बर्ट आईंस्टाइन को एक समारोह में बुलाया, आईंस्टाइन अपनी पत्नी के साथ कार्यक्रम में हिस्सा लेने गए, उन्होंने माउंट विल्सोन पे स्थित अंतरिक्ष वेधशाला भी देखि, उस वेधशाला में उस समय तक बानी दुनिया की सबसे बड़ी दूरबीन देखने के बाद आईंस्टाइन के पत्नी ने वेधशाला के प्रभारी से पूछा इतनी बड़ी दूरबीन से आप क्या देखते हो? प्रभारी को लगा की श्रीमती आईंस्टाइन का खगोलीय ज्ञान कुछ कम  है, उसने बड़े गर्व से उत्तर दिया, इससे हम भ्र्म्हंड के रहस्यो से पर्दा उठाते है, जिसपर आईंस्टाइन की पत्नी ने कहा की, बड़ी अजीब बात है! मेरे पति तो यह सब उनको मिली चित्तियो के लिफाफों पर ही हल कर लेते हैं

 

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3)          अल्बर्ट आईंस्टाइन की यादास कुछ ज्यादा अच्छी नहीं थी, उन्हें मोबाइल नंबर भी याद रखने में प्रॉब्लम होती थी, यहातक की उन्हें खुद का मोबाइल नंबर भी याद नहीं रहता था, एक दिन आईंस्टाइन  के एक कर्मचारी ने उनसे मोबाइल नंबर पूछा तो, आईंस्टाइन अपने पास की दयारी में मोबाइल नंबर ढूंढ़ने लगे, तभी सबकर्मी चाक्कित होकर बोला आपको अपना खुदका टेलीफोन नंबर भी याद नहीं है, तो आईंस्टाइन बोले! किसी ऐसी चीज को भला क्यों यद् राखु जो ढूंढ़ने पर आसानी से मिलती हो

              अल्बर्ट आईंस्टाइन कहा करते थे वे किसी ऐसी चीज को याद  नहीं रखते जिसे दो मिनट में ढूंढा जा सकता हो



2)          अल्बर्ट आईंस्टाइन मोज़े पहनना पसंद नहीं करते थे, उनसे इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया की जब वे स्कूल में थे तो उनके मोज़े पैर की उंगलियों से जल्दी फटते थे इस वजह से वे मोज़े पहनना पसंद नहीं करते थे




1)          अल्बर्ट आईंस्टाइन उम्र के आखरी हिस्से में काफी उदास थे क्युकी उनका ईक्वेशन E = mc2 का गलत इस्तेमाल हो रहा था, एटम बम भी इसी एक्वेशन का हिस्सा हैं, और आईंस्टाइन को इंसानो की बहुत परवाह थी फिर उन्होंने इस एक्वेशन को अच्छे कामो में लाने पर सोचा और फिर एक बार कामयाबी ने अल्बर्ट आईंस्टाइन के कदम चुम लिया





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