आपने चीपकली को तो देखा होगा क्युकी ये लगभग हम सभी के घरो मे पायी जाती है और हुमसे प्यार भी करती है। अक्सर लोगो का केहना है कि चीपकली काफी जहरीली होती है, अगर ये किसीके खाणे मे गीर जाये तो, इसका जहर पुरे खाणे मे फैल जाता है, और उसे खाकर कोई भी मनुष्य मर जायेगा। चलो ये तो हुई अपने घर कि चीपकली यानी घर कि चिपकू कली। अगर मै कहु कि एक ऐसी प्रजाती की चीपकली है जो इंसान के साथ अन्य जानवारो को चबा के खा सकती है तो आपका reaction क्या होगा?
जि हा ये वास्तविकता है / सच्चाई है। तो यहा हम इसी चीपकली के बारे मे जानेंगे, जो आपके होश उडा देगी।
Comodo Dragon
क्या आप Komodo Dragon को जानते हो? नही तो आप यहा जान जावोगे और, अगर आप जानते हो तो यहापर आपको कूछ नयी जानकारी मिल सकती है।
Komodo Dragon एक दुनिया जी सबसे बडी और सबसे खोफनाक प्रजाती कि चीपकली है, जो बडीही आक्रमक होती है। ये अपने से बडे शिकार को बडीही आसानीसे मार सकती है।इस प्रजाती के चीपकली बहुत हि शक्तीश्याली होते है, और इनके इतने शक्तीश्याली होणे का राज है इनकी मजबूत टांगे, दमदार पूंच, बडे नुकिले और मुडेहुये पंजे होते है जो इन्हे किसीभी जागाह गड्डा खोडणे मे महत्वपूर्ण भूमिका निभते है।वो केहते है ना छोटा मु, बडी बात,
कूच इसी तरह Komodo Dragon के शरीर कि रचना होती है। शरीर के मुकाबले इनका मुह काफी छोटा होता है जो इन्हे और भी खोफनाक दिखने मे मदत करती है, और ये सांप कि तरह अपने मुह को ज्यादा खोल सकता है।
अरे हा... मुझे एक शेर याद आया, शेरो के दात दिखाने के और, और खाने के और होते है, बिलकुल इसी तरहा इनकी नजर बहुत हि तेज होती है पर, ये अपनी बीच से कटी जीब से अपने शिकार का पता लगाते है। इनमे एक बहुत कमाल कि Technology विकसित हुई है जो इन्हे, हमेश्या सतर्क रखती है वो येह है कि ये सिर्फ अपनी जिब हिलाकर ८ कि.मी तक अपने दुस्मानो की मेहक ले सकते है।
Komodo Dragon एक बहुत विश्याल और रेंगनेवाला जीव है। ये आकार मे ३ मीटर यानी करीब १० फुट लंबे होते है। इनका वजन १८० kg तक होता है। ऐसा भी मना जाता है कि Comodo Dragon कूच द्विपो कि विलुप्त हुई एक बहुत बडी और बहुत हि ज्यादा खोफनाक Mammalian प्रजाती कि Italian चीपकली के कारण विकसित हुये है।

अगर बात करे इनके प्रजनन कि तो, सितम्बर का महिना इनके प्रजनन का महिना होता है। इसके बात मादा Komodo Dragon २५ ते ३० अंडे देती है, ८ महिने बाद आंडो से आधे मीटर छोटे बच्चे बाहर आते है। Komodo के शरारती बच्चे पैदा होते हि पेडो पर चढ जाते है, वरना Komodo Dragon इन नन्हे बच्चो को खा जायेंगे ये शरारती बच्चे किडो जैसे जीवो
का शिकार करके अपनी शिकार करणे कि ट्रेनिंग पुरी करते है, और लगभग एक साल तक कोई डिग्री ना मिलने के कारण ये अब जमीन पर आते है। Komodo dragon को अकेला हि रहना पसंद है। ये दिनभर धीरे - धीरे जाते है, और अपना शिकार खोजते है। ये तैरने मे भी अच्चे होते है। ये तैरकर हि अपना टापू बदलते है।
Komodo Dragon एक मांसाहारी प्राणी है। ये शिकार तो करता है पर, इसे मरे जनवरो का मांस खाना अधिक पसंद है। ये १५ कि.मी प्रती घंटा कि रफ्तार से कूच दुरी तक भाग सकता है। इनके दात Shark मछली कि तरह नुकिले और किनारे पर होते है। Komodo Dragon के पूंछ का वार कोडे के वार कि याद दिलाता है। ये अपने दुस्मन को अपनी मजबूत पूंछ से भी घायाल कर सकते है। ये ज्यादातर सडाहुवा मांस खाते है, इसलिये इनके थुंक मे ५० तरह के किटाणू पाये जाते है, जिसके वजह से शिकार को काटने पर किटाणू तेजी से अपना असर दिखाते है, और इससे इनको फायदा हि होता है। जब कोई शिकार इनकी काट का शिकार हो जाये तो वो १ से २ घनटो मे अपनी आत्मा को छोड देगा, और फिर Komodo Dragon उसे धुंडकर खा जायेंगे।
कभी - कभी तो इन खुंखार शिकारियो ने बच्चो, बुढो और बिमार मनुष्यो का भी शिकार किया है। अगर आप भी किसी ऐसी जगह घूमने जाते है तो, ऐसे जानवर से जरा बचके रेहना, ऐसे जनवर छुट्टीयोका मजा खराब कर सकते है।
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